बोर्ड परीक्षाओं के समय विद्यार्थी का मानसिक संतुलन आखिर बिगड़ क्यों जाता है ?
अक्सर बोर्ड परीक्षाओं के समय विद्यार्थी का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है, बोर्ड परीक्षा जितना नजदीक आते रहता है उतना ही विद्यार्थी का मानसिक दबाव बढ़ने लगता है और गलत कदम उठाकर नकारात्मक काम कर लेते हैं और पूरी जीवन अपनी बर्बाद कर लेते हैं | जबकि विद्यार्थी पहली कक्षा नवीं तक वार्षिक परीक्षा दे चुका होता है। आखिर बोर्ड परीक्षा के समय ही विद्यार्थी का मानसिक संतुलन बिगड़ता है, इसका कारण क्या है ? इससे कैसे निधान मिल सकता है? मेरा मानना है - बोर्ड परीक्षा से विद्यार्थी का मानसिक असंतुलन नहीं होता है क्योंकि वह अभी तक इस तरह का परीक्षा पहली कक्षा से नवीं तक दे चुका होता है और वह उस समय उनका मानसिक संतुलन ठीक होता है। बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थी का मानसिक संतुलन इस बात पर निर्भर करती है कि समाज के कितने आदमियों ने विद्यार्थी को तंग किया बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जैसे मां से बात हुई तो बोली - बेटा बोर्ड परीक्षा नजदीक आती जा रही है, पिताजी - से बात हूई तो - बेटा बोर्ड में अच्छा करना, स्कूल में शिक्षक बोलने लगे बोर्ड में कोई फेल न होना , रात्रि हुई त...